बुधवार, 14 फ़रवरी 2018

आओ सरयू से बात करें -सुखमंगल सिंह 'मंगल'पालीवाल

आओ सरयू से बात करें- सुखमंगल सिंह'मंगल'पालीवाल https://www.bing.com/search?q=+%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%B2+%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&qs=n&form=QBRE&sp=-1&ghc=1&lq=0&pq=+%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A4%B2+%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9&sc=7-13&sk=&cvid=C0CEEFB155EE49F892A6E1544C22A24A&ghsh=0&ghacc=0&ghpl=

58 टिप्‍पणियां:

  1. "क्लीनिंग स्प्रे "
    नार्वे यूनिवर्सिटी आफ वर्गेन ने की एक शोध /
    उड़ गये विश्व के तमाम लोंगों के बैठे बैठे होश |
    टायलेट वाश वेसिन या शीशे सफाई वाले रसायन में दोष/
    जिससे महिलाओं के फेफड़े समय से पहले होते हैं कमजोर |
    वैज्ञानिकों के खोज में ज्ञात हुआ स्प्रे के रसायन में है खोट /
    जिसने श्वास नली को पहुचाते रहते वायु के माध्यम से चोट |
    उधर नाइजीरिया के मैदुगुरी शहर में हो गया है भारी विस्फोट /
    शरीर- फेफड़े को कर रहे छलनी अट्ठारह हलात बाईस में छोभ |
    हानिकारक रसायन म्यूकस की झिल्ली को करती रहती प्रभावित /
    रसायन के असरदार असर फेफड़े पर पड़ता रहता है दुस्प्रभावित |
    फेफड़े की क्रियाशीलता पड़ती मंद और उम्र होती रहती है भारी /
    वर्गेन यूनवर्सिटी का यह अनुसंधान निकलेगा दुनिया पर प्रभावी ||

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  2. लोहा को सोना बना देता है पारस पत्थर
    पानी स्वच्छ बनाता स्कोलेसाईट पत्थर |

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  3. "सत्य पर कठिन "
    दूसरों को बर्बाद करने वाले पहले खुद बरबाद हो जाता है |
    धन के बढ़ने पर गलत काम न करें | गलत काम से धन का नाश होता है|
    रिश्ते बनाते समय सत्य का सहारा लेने वाले को अपनाएं | सत्यवादी सच मार्ग बताने का काम करता है |
    वक्त सच और गलत कर्म की सीख्देता है |
    घमंड विनास का परिचायक होता है |
    इच्छाएं अनंत होती हैं | इच्छाएं उसको सही मार्ग पर लगाएं |
    खुशियों के लिए संतोष बड़ा हाथ है |
    विनम्रता उंचाई प्रदान कराता है |

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  4. "समाज "
    धनिक मित्र जो धोखा देता /
    विपरीत समय में वह रोता |
    शारीरिक क्रिया में आलस लाता /
    रोगी बनकर पहले मर जाता |
    हिंसा और घृणा को छोड़ें /
    सोशल मीडिया से खुद जोड़ें |
    भद्दापन अपने मन से छोड़ें /
    रचनात्मक आलोचना जोड़ें |
    मनमानी औ चिंता छोड़ें /
    सभ्य समाज दिल से जोड़ें |
    अच्छे मार्गदर्शक खोजें/
    विरले सक्षम जो जोड़ें ||

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  5. मेरे द्वार जब भी तू आया
    निर्मल जल औ गुण खिलाया
    तूने समझा स्वात किया मेरा
    हमने केवल अपना फर्ज निभाया।।

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  6. तूने मुझे दोपहर में गन्ने का कच्चा रस और
    हरी मटर की घुघरी प्रेम से भरपेट खिलाया
    तूने बोला आपका भरपूर स्वागत नहीं किया
    हमने सोचा आपने आयरन,प्रोटीन से भर दिया।

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  7. जाने क्यो अपने कृत्यों पर,लोग बाग इतराते /
    ठहरी नदियों की उस धारा में, ही लोग नहाते।
    सरजू की निर्मल धारा बह रही नहीं वे जाते/
    दर-दर भटक रहे बनरारी, हमराही नही पाते।
    स्वच्छ समन्दर की लहरों में गोता नहीं लगाते/
    घडियालो की पूछ पकडने में प्रभु पिता ।बहलाते।
    सुवह-साम पाथर पूजते माँ-बाप घर भरमाते/
    'मंगल' कहता सुना मनोहर माई बाप गुण दे जाते।।

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  8. १- ओबामा आये भारत -अमर उजाला २५ जनवरी २०१५ पर मेरी टिप्पड़ी -
    अच्छी हुई सुरक्षा ,तो हर्ष होना चाहिए
    हमारे भारतीयों को ,गर्व होना चाहिए |
    सारे जहा न आतंक ,आक्रोश होना चाहिए
    अपनी स्मिता का ओ होश होना चाहिए ||(६:३ A.M.,jan. 25,2015 )
    2-ajay singhगुजरात को टिप्पड़ी -
    गर लिख दूं अपनी यादें ,किताबों की तरह
    होगें बहुत से बलवे ,फिर यूं ही शहर में !
    कैसे बनेगा गुलशन ,अब फूलों के विना
    उजड़ी हैं कलियाँ इतनी रिश्तों के जहर में ||(२५/१/२०१५ )
    २अ -किस दिल से बयान करू बधाई
    आप तो मेरे दिल में बसे हो मेरे भाई |(२५/१/२०१५ )
    ३- सुन्दर विचार लेकर जब आप आ जाएँ !
    राम, की कृपा 'मंगल' जीवन सुखमय पाए |
    वैभव सारा साथ दिखे ,मंगल दुआ वही है
    कहिये कैसे किससे कहें उल्लास उमंग सही || (गूगल पर हाई.९ /१/१५ )
    ४- आज विश्व को हिंदी दिवस हौ मनाना हुआ
    दिल से ममता का कोई गाना-गाना हुआ ||(१०/१/२०१५ )
    ५-दिल्ली रेस्तरा में दो युवकों ने की फायरिंग -आजतक पर टिप्पड़ी -
    निगाहें लगाए रखना ,ठहरा सागर डगर
    क़ानून काम करता दिखता सारा नगर | (२५/१/२०१५ )
    ६- चीन में भी रिलीज होगी आमिर खान की पी.के. ...-दैनिक जागरण पर -
    इतिहास ही रहा कहता हमको ! हम रहे बदनाम
    गन कोई बन्दूक लाठी लेकर हमें करे सदा सलाम !(२५/१/२०१५)

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  9. सुखमंगल सिंह की डायरी वर्ष २०१७ (१)
    क्रमांक / शीर्षक/ मेरी डायरी में दिनांक वर् /लिखीगई,दिनांक वर्ष/ प्रकाशित
    १- चिड़िया फरवरी२८ ,२०१७ / नवम्बर४,१७ स्वर्गविभा
    २-अग्गेय (कवि ) मार्च ६,१७ -नवम्बर ४,१७ -------------------------------------
    ३-कुत्ता घर का ब्लागर सुखमंगल १९५७ ,नवम्बर ४,१७ --------------------
    ४- राम फरव्रि११,२०१४ --------------- -------------
    ५- नगर निगम मार्च८,१७ ------------ -------
    ६- लालच मार्च९,२०१७ --- --------
    ७-अफसर नहीं आते मार्च१०,१७ जुलाइ८,१७ नवजीवन की अपनी कहानियाँ
    ८-दीपक मार्च १३,१६ - जन १० २०१७ फेसबुक /पतिलिपि काम
    ९- बेटा मार्च१५,१७ ------- प्रतिलिपि काम
    १० आन्दोलन ? मार्च१७,२०१७ /अगस्त ९,१७ --------------
    ११- स्वच्छता मार्च २०,१७ /अगस्त १०,१७ / कोलाहल से दूर
    १२- चुनरी सिल रहा मार्च२२,,२४,२०१७ ------------- साहित्य शिल्पी
    १३-इतिहास रचते रहे मार्च२७,१७ ---------- ------------
    १४- कानूनन कुचला जाएगा , ----- मार्च २९,२०१७ ----------------
    १५- क्षणिकाएं अगस्त८,१७, अप्रैल ४,२०१७ -----------
    १६ - क्षणिकाएं अप्रैल ४&६ ,२०१७ अगस्त ८ ,१७ स्वर्गाविभा
    १७ -सत्ता -सुख अगस्त११,२०१७ अगस्त३० स्वर्गाविभा
    १८ गूगल सी इ ओ को पात्र अगस्त१३,१७ अक्टूबर २४,१७ ,गूगल
    १९-सूरज उगायेंगे अप्रैल१५,१७ अप्रैल१५,१७ ----------
    २०-गधा & गधे छा गये (ब्यंग ) अप्रैल १८,२०१७ --- अ० भा० स० एसो ०
    २१- सरयू में नहाते अप्रैल २५ ,२०१७ / अप्रैल ४ ,२०१८ /गूगल +सुखमंगल
    २२-राम तेरी गंगा अप्रैल २७ ,२०१७ / अप्रैल ४ २०१७/भौरे गाये ये कविताये
    २३ -भाषा -बोली मई५,२०१७ ----------- गूगल +सुखमंगल
    २४ मुक्तक --वही -- ९ /५/१७ को नवीन मौर्य के टाइम लाइन पर
    २५- बालवरगंज जौनपुर/समाचार ६मई१७/ २० मई २०१८ "जागो कण-कण झांको "
    २६- दो राहे पर?(व्यंग ) / मई८,२०१७ / दिसंबर ३,२०१७ -----------------
    २७- सोना उगेगा ?/ मई १०,२०१७ / दिसम्बर४,१७ -----------------
    २८-अहंकार -नारी /-वही - / मई ९,२०१८ /दुर्गेंद्र प्र० सिंह चौहान (वि.हि.सं.कनाडा )
    २९-खोज हो रहा(होलियाना ) / मई १२,१७/ दिसम्बर५,२०१७ --------------
    ३०-जयशंकर प्रसाद महान साहित्यकार /मई १५,२०१७/७-१-२०१७ /google+sukhmangal
    31-राम आये मोरा गाँव /मई१९,१७ /३०-४-२०१६ /Anil पा० -मन पाए विश्राम जहां ,Duliajan ,Assam
    32-परमात्मा की सत्ता /मई २२,१७ /मई १,२०१६ ----------
    ३३-विश्व पर्यावरण दिवस संरक्षण /मै२४,१७ /फरवरी ९,२०१६ ------------
    ३४- पर्यावरण प्रदूषण से मुक्ति मिले /मै२६,१७ / फरवरी ९,२०१६,१२:४४ P.M./एलोपोयट्री
    ३५-मुताहा निकाह /२९मई२०१७/ फरवरी १०,२०१६ / google +sukhmangal
    36-क्षणीकाएं /मई ३१,१७/ फरवरी २७,२०१८ /नवजीवन की अपनी कहानियां
    ३७-प्राइमरी स्कूल अहिरौली रानीमऊ /वही / ------------/ --वही ---
    ३८-कक्षा तीन से पांच /जून१,१७/ -----------------------/ नवजीवन की अपनी कहानियां
    ३९-मुक्तक /जून५,१७/ जून ६,२०१८ /फेसबुक
    ४०- जल जागरूकता /जून६,१७/ फरवरी २०,२०१८ /हिंदी कुञ्ज
    ४१-अपने अपनों में मस्त /जून८,१७/ जनवरी १६,२०१८/ सुविचार हिंदी काम
    ४२-हिंदी की शाख बढी /जून१०,१७/ जनवरी१७,२०१८ /अनमोल साहित्यिक लड़ियाँ
    ४३- हाई स्कूल-पढ़ाई /जून१३,१७/मार्च२,२०१८ ८:२५ A.M./ ------------
    44- काशी दर्शन एक झलक /जून १४&१६,२०१७/ प्रतिलिपि काम &अपनी बात आपके साथ
    ४५-शीर्ष नेता मोदी /जून१५,१७/नवम्बर २२,१७ /गूगल सार्वजनिक &अंग्वाल न्यूज
    ५६-मुक्तकऔर न्यूज /जून१७,१७/जून१,१६ व जुलाई १७,१७ /अखिल भारतीय सद्भावना
    एसोसिएशन
    ५७ -मोहतरमा आयेंगी ?/जून१९,१७/मई ३,२०१८ / ---------------
    ५८- सरयू की धार /जून२०,१७/दिसम्बर६,२०१५ ,8:२४ A.M./ कोलाहल से दूर रूपांतरण
    ५९-सरयू /--वही --/ मार्च२,२०१८ --------------------/वही ---------
    ६०-दुनिया /जून २१,१७/जन० ३,२०१८ /रास्ट्रीय हिंदी मासिक पत्रिका में भेजा ३-५-२०१८

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  10. ६१-बंजर सजाएं -अलख जगाएं /जून२२,१७/ जनवरी ११,१८ / नवजीवन की अपनी कहानियां
    ६२-निहत्था घायल /जून२३,२०१७ /फरवरी२०,२०१८/ ----------------
    ६३- जल की उपयोगिता /जून२४,१७/जनवरी ११,२०१८ / जल जीवन आधार में प्रकाशित
    ६४-साई जगता -जगा रहा /जून२६,१७/फरव्री२०,२०१८ / ------------
    ६५- "मंगल" जून२७,१७/ फरवरी २५,१८/ प्रतिलिपि काम & नवजीवन की अपनी कहानियां
    ६६- क्षणिकाएं / -------------/अप्रैल २६,२०१८ /स्वर्विभा
    ६७- सुविचार /जून २९,१७/ जून २९,,2018/ हिंदी कविता (sukhmangal singh Hindi poetry)
    ६८ - क्षणिकाएं /जून३०,२०१७ / मार्च१,२०१८ / स्वर्गविभा
    ६९-रसिया सुना /जुलाइ३,२०१७ / फरवरी२६,२०१८ / प्रतिलिपि काम
    ७०- चालबाज राजनीति? /जुलाइ५,१७ / फरवरी२६,१८ / -------------
    ७१- क्षणिकाएं / जुलाइ७,२०१७ / फरवरी २७,२०१८ / नवजीवन की अपनी कहानियां
    ७२- स्कूल जब जाते/ जुलाइ१०,१७/फरास्वारी २७&२८,२०१८/ नवजीवन की अपनी कहानियां
    ७३-कक्षा पांच /जुलाइ१२,१७/ फरवरी२७,२०१८ रात्रि २:५२ / नवजीवन की अपनी कहानियां
    ७४-जूनियर हाई स्कूल /जुलाइ१४,१७/मार्च ७,२०१८ ,५:४० p.m. / ---वही ------
    75- शुभकामना /जुलाइ१५,२०१७/ जन्वरि१८,२०१८ / हरिशंकर पूना के टाइम लाइन,फेसबुक
    ७६- प्राइमरी पा० मुबारकपुर अंजन /जुला०१७,१७/फरवरी २८,१८ /नवजीवन की कहानिया आदि
    ७७- नैतिकता /जुला०१८,१७/मार्च २,२०१८/स्वर्ग विभा & नवजीवन की --------
    ७८- शिक्षा से सीखें / जुला०१९,१७/ फरवरी २८,२०१८ /प्रतिलिपि काम १/३/२०१८
    ७९-नरकट -किरकिट की लेखनी /जुला०२०,१७/मार्च१०,१८/हिंदी कुञ्ज में भेजा
    ८०- मालिक का धन /जुला० २१,१७/ जनवरी १७,२०१८ / -----------
    81-भारत प्यारा /जुला०२२,१७/जनवरी २०,२०१८/" सरजू तट से " में प्रकाशित
    ८२- जौहर में जलती / जला० २४,१७/ जनवरी २०,२०१८ / " सरजू तट से " में प्रकाशित
    ८३- पाती तो याद आयेगी /जुलाइ२५,२०१७/ २५जुलाइ१७/कोलाहल से दूर रूपांतरण
    ८४-रूद्र (भारत का नवनिर्मित हेलीकाफ्टर /जुला२६,१७/-----------/----------------
    ८५- चराग हूँ /जुला २७,१७ /फरवरी २,२०१८/ ------------
    ८६- कविता कह जाती /जुलाई २७ ,१७/ जुलाई २७,१७7:06 P.M./कोलाहल से दूर रूपांतरण
    ८७- चीख सुनना जरूरी है ,कहो?/ -वही---/ वही ---१२:१६ A.M. कोलाहल से दूर रूपांतरण
    88- आने वाला वसंत /जुलाइ२८,१७ /जनवरी२०,२०१८/विश्व रचनाकार मंच &google +
    89-किरणों का धरा प्रवेश /जुला० ३१,१७/जनवरी १७,२०१८ / -----------
    ९०- समाज / --वही-- /फरवरी१८,२०१८ / नवजीवन की कहानियाँ

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  11. ९१- भारत (INDPA) में बलात्कारी के लिए /अग्स्त८,१७/अग्स्त७,१७ (संकलन)
    ९२-स्वच्छता जागरण/अगस्त ९,२०१७/ अगस्त ९,१७,४:४४ P.M./कोलाहल से दूर रुपान्तरण कविता
    ९३- बिटिया ही कीजो / अगस्त१२,१७/ मई३,२०१८ /-----------
    ९४- बैकुंठ धाम अयोध्या /अगस्त१५,१७ /मार्च ८ ,२०१८/ -----------
    ९५-चित चोरी /अगस्त१६,१७/ फरवरी २४,१८/ ---------
    ९६- श्रेष्ठ नदी सरयू / अगस्त१७,१७/ मार्च८,२०१८ /हर्ष दीक्षितके फेसबुक
    ९७- क्षणिका / अगस्त१८,१७ / मार्च १०,२०१८/ ---------
    ९८- फूलों का गुलदस्ता /अगस्त१८,१७/ मार्च १०,२०१८ / Yashoda agrwal
    ९९- क्षणिकायें/अगस्त१९,१७/ मार्च१०,२०१८ / स्वर्गविभा
    १००-गाडी /अगस्त२१,१७/ मार्च १०,२०१८/ यशोदा अग्रवाल ,कवि अरुण जेमिनी
    १०१-भारत-चीन (व्यंग ) अगस्त२२,१७/मार्च३ ,१८/ --------------
    १०२- क्षणिका (व्यंग )/ अगस्त२२,१७/ -वही- / ------------
    १०३- लिंगानुपात /अगस्त२३,१७/ -वही - /यशोदा अग्रवाल ,निराला इला ०
    १०४- एड्स का इंजक्सन ? /अगस्त२४,१७/ अगस्त २४,२०१७/ कोलाहल से दूर रूपांतरण [कविता
    १०५ -सत्याकर्मी मनुष्य /अगस्त२५,१७/फरवरी १८,१८/ ------------
    १०६-सत्याकर्मी / -वही- / मई ३,२०१८ / हमारा संसार में प्रकाशित ३/५/१८
    १०७-होली (व्यंग रचना )/अगस्त२६,१७/ अलिखित / ------------
    १०८-धरा निराली /सितम्बर२,१७ /मई२८,२०१८/ ---------
    १०९- पर्वत बोले ?/-वही --- /सितम्बर३,२०१७/कोलाहल से दूर रूपांतरण [कविता
    ११०-मुक्तक /सितम्बर४,१७/ अप्रैल१३,२०१८ /हिंदी समय काम में १:५४ बजे
    १११- भारत दर्शन /सितम्बर५,१७/फर० १५,१८/ ----------
    ११२- मुक्तक /सित०६,१७/ अप्रै०१३,१८/ हिंदी समय काम १:५४ P.M. ,१३/४/१८ |
    ११३- खाई बढल / -वही- / -वही - / "सरयू तट से "और हिंदी समय काम १:५३ P.M.
    114-रघुनाथ-रावण / सित०८,११,१३,१४ ,२०१७/ अप्रैल१६,१८/ ------------
    ११५- यहाँ योगी से ऊपर योगी /सित० १५,१७/ साहित्य दर्शन में २८/३/१८ ,भेजा .व google+sukhmangal में प्रकाशित
    116-मर्यादा / सित१६,१७ /अप्रैल१६व २० ,२०१८/ सूरज की रोशनी फैलने तो दो !,अपनी बात आपके साथ ,मर्यादा जीवन का सत्य में टिप्पड़ी |
    ११७- जब पढ़ने जाता / सित१९,१७ / अप्रैल२९ ,१८/ ------------
    ११८-क्षणिका / सित२१,१७/ अप्रैल२५ ,२०१८ / ------
    ११९- मुक्तक / सित२२,१७ / अप्रैल२६ ,२०१८ / -------=----
    १२०- इनाम / सित० २३,१७ / मै०२,!०:०५ A.M. /-------------
    १२१-पृथ्वी दिवस /सितम्बर२५,१७/ सितम्बर२२,२०१८ / हिंदी वाटर पोर्टल ,फेसबुक
    122-हथियार /सितम्बर२६,१७ /अप्रैल४,२०१८ / ------------
    १२३- साहित्य / सितम्बर२७,१७ / अप्रैल२२,१८ / -----------
    १२४- मुक्तक / सितम्बर२८,१७ / जून ७,२०१७ / वाट्स समूह
    १२५- चीन / सितम्बर२९,१७ /मार्च१३,२०१८ /सूरज की रोशनी को फैलने तो दो !, ग्राउंड रिपोर्ट पर चेक - सेना
    १२६-चलती चली नदी /अक्तूबर२,१७ /फर० २१,२०१८/ google+sukhmangal
    127-क्षणिका / अक्बटूर३ ,१७ /अप्रैल२३,१८ /कन्हैया कुमार की पोष्ट पर
    128-एकता रचना / अक्टू ३ ,१७ / अप्रैल२३,१८ / प्रदीप राजन की पोष्ट पर
    १२९- भोजपुरिया / अक्टू० ५,७ ,२०१७/ अक्टूबर ४,२०१७ /स्वर्गविभा १०-४-१८
    १३०-ऊपर आकाश /अक्तूबर७,१७/ अक्तूबर७,२०१७/ कोलाहल से दूर रूपांतरण [कविता .8:42P.M.
    १३१-प्रतिबिम्ब कहाँ ?/ अक्तूबर७,१७ / अक्तूबर८ ,१७ / -वही - १:४६ A.M
    १३२- करवा चौथ कुशल क्षेम की दुआ /-वही १७ &३१,२०१७ / अक्टूबर ८,२०१७/ कोलाहल से दूर रूपांतरण समय १:५३ /google+sukhmangal
    १३३- व्यायाम /-वही -/ -वही- / कोलाहल से दूर रूपांतरण [कविता .१:३४ A..M.
    134-आदिकवि वाल्मीकि/ वही-/वही/कोलाहल से दूर रूपांतरण[कविता,१:३५ A..M.
    135-निखार /अक्टूबर१०,१७/अप्रैल९,१८/'मार्च १८से३०,२०१५ सोशल साइट पर सुखमंगल से लिखित वार्ता डायरी" आलेख में १०अप्रैल१८,६:५५ P.M.
    136-प्रमुख टिप्पड़ियां ,संकलन /अक्टूबर२२ ,१७/नवम्बर २२,१७ /प्रतिभा मंच,हिंदी विश्व संस्थान कनाडा आदि |
    १३७- मजदूर /अक्तूबर२४,१७ / अप्रैल२१,१८/"अपनीबात आपके साथ "व रामदीन की कविता में टिप्पड़ी |
    १३८- आलेख "(तीन अदद)/अक० २५,१७/ ----/"अपनीबात आपके साथ "सम्पादक सुखमंगल सिंह
    १३९-सूरज की किरणों से सीखें /अक्टूबर २८,१७/-------/"सरजू तट से "-सम्पादक सुखमंगल सिंह
    १४०-असल फसल/नवम्बर ६,१७/----/"भौरे गायें ये कवितायें"-सम्पादक सुखमंगल

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  12. १४१ -गौरैया /नवम्बर११,२०१७/ --- / विश्व गौरैया दिवस
    १४२-इतिहास बनाएं /नवम्बर१५,२०१७/मार्च१,२०१८/नवजीवन की अपनी कहानियां
    १४३-नेटवर्क काशी में / नवम्बर१७,२०१७/मई२४,२०१८/ गूगल प्लस सुखमंगल
    १४४- माँ का कर्ज /नव्म्बर२०,१७/ --------/"शान्ति -सद्भाव "
    १४५- पूर्वकाल से मेरा नाता / नवम्बर२०,२०१७/नवम्बर १८,२०१७/ डिसकसन सुखमंगल
    १४६- मैं धरा हूँ /-वही- / ------- / कोलाहल से दूर रूपांतरण [कविता
    १४७- कोणार्क.सूर्य मंदिर आलेख/नवम्बर२०,२०१७/जनवरी ८,२०१६/विकीवफेसबुक
    १४८-संगीत -सुरन माँ तान / नवम्बर२२,२०१७/जून८,२०१६/अनमोल साहित्यिक लड़ियाँ -सम्पादक सुखमंगल सिंह
    १४९- अनहदकृति में अंक ९;मार्च२३,वर्ष २०१५ /नवम्बर२३,१७ पर /मार्च२३,२०१५
    १५०-क्षणिकाएं /नवम्बर २४व २७ ,१७/ मार्च३१,२०१८ / स्वर्गविभा
    १५१-प्यार के घर / नवम्बर२५,१७/ जुलाई १,२०१७/ प्रकाशित अनहदकृति में
    १५२- अनहदकृति में अंक १६१ ;जनवरी८ ,वर्ष २०१७ /नवम्बर२८,१७/जन८,२०१७
    १५३-गंगा (व्यंग रचना )/नवम्बर२९,१७/ फरवरी २२,२०१८ /स्वर्गविभा
    १५४-नोट एक प्रचालन कैसे /नवम्बर३०,१७/दिसम्बर१९,२०१७/google सार्वजनिक
    १५५- अनहदकृति में अंक १६ ;जनवरी८ ,वर्ष २०१७/-दिस०१,१७/जन ०६,२०१७
    १५६- अप्रैल फूल दिवस / दिस २,१७ / मार्च ३,२०१८ /स्वर्गविभा
    १५७-क्षणिका / दिस४ ,१७/ दिसम्बर१९,२०१७ / स्वर्गविभा
    १५८-कविता दारू पीती है?/दिस०५,१७/ दिसम्बर०५,२०१७ /फेसबुक
    १५९- गंध रचना /दिस०६,१७/ अप्रैल२३,२०१८ / --वही--
    १६०-जूनियर हाई स्कूल छ: से आठ तक शिक्षा /दिस०७से२३ ,१७/मार्च०२,२०१८/ नवजीवन की अपनी कहानियां ९/३/२०१८ ,९ बजे
    १६१-एक गलती छोटी भी /दिस२८,१७/मार्च०९ ,२०१८ /-------
    १६२-झगडालू नारी /-वही- /अप्रैल२६,२०१८ / --------
    १६३-क्षणिका /दिस३०,२०१७ / -------वही-------- / स्वर्गविभा
    --------------------०००-------------------sukhmangal@gmail.com

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  13. हार्दिक शुक्रिया नवजीवन की अपनी कहानियां

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  14. मुरलीधर मोहि मुरली सुना
    श्री राम पधारे हैं।
    अयोध्या और मथुरा वासी
    हरि हर दुलारे हैं।।

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  15. इच्छा अपनी दोनों हम
    एक साथ सो जाए।
    बच्चे और बहू अपने
    आकाश मार्ग से आएं।।

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  16. "जीवन"-सुखमंगल सिंह'मंगल'
    जीवन तू कितना प्यारा;
    अच्छा मिला तो ते न्यारा।
    शास्त्र सहित काया तुम्हारे;
    कर्म-धर्म सब तेरे सहारे।।
    जीवजन्तु सबको प्यारे;
    वर्ना होते तू किनारे।
    घात में सारे-सारा;
    जीवन तू कितना प्यारा।।s.m.singh,01जुलाई2018सबेरे

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  17. "श्रीराम"-सुखमंगल सिंह'मंगल'पालीवाल
    प्रकटे कृपाला अवधपुरी,श्री रामचंद्र जी कहलाए।
    माया को संग किए रघुबर,शिवशंकर जी देखन धाए।।
    देव लोक हर्षित अवध नगरीसे,अगणित मनपुष्प बर्षाए।
    मेरे प्रभु श्रीराम जी प्रकट हो,अयोध्या नगरी में आए।।
    -s.m.singh,जून23,2018,03:30A.am.


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  18. "जिह्वा "
    जिह्वा सुनो मुझे बाप,
    तू किससे कहलवाती हो!
    जिसे मतलब नहीं किसी का
    क्यों तू सह जाति हो।।
    अभाओं में पाला - पोसा,
    पाल पोस उसे बड़ा किया।
    जो माने बात ना मेरी,
    तू कैसे सह सकती हो।।
    गलत सही बालक करते,
    पर बड़े माफ़ उन्हें करते।
    श्रद्धा विहीन बालकों को,
    कैसे जिह्वा सहती हो ।।
    धर्म कर्म ताख शाख,
    अपने मैं में रहते हों।
    मातृ पिता से ऐठन में,
    उनको भी तुम सहती हो।।
    - सुख मंगल सिंह ' मंगल '

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  19. समीक्षा -
    सुकवि सुखमंगल सिंह कृत इलेक्ट्रानिक मीडिया से प्रकाशित ' सुपाथेय षट दर्शन (चतुर्थ खण्ड ) को पढ़ने का अवसर प्राप्त हुआ | इस संग्रह को उन्होंने अपनी माता श्री और पिता श्री को सादर समर्पित किया है | इस कृति में समय-समय पर कवि द्वारा धार्मिक स्थलों ,संतों-महात्माओं के दर्शन आदि से ब्याप्त अनभव को पाठकों के साथ साझा करने का प्रशंसनीय प्रयास किया गया है | आज के यांत्रिक दिन चर्या और जीवन में शान्ति प्राप्ति का सुगम साधन ध्यान-दर्शन की साधना ही लाभकारी होगी, ऐसा ही हो,यही कवि की लोक कामना है |
    सुकवि सुखमंगल जी इस कृति के माध्यम से भारतीय संस्कृति ,सभ्यता ,धर्म, साहित्य ,कला आदि को निरंतर सशक्त बनाने की प्रशंसनीय पहल करते हैं | इसके लिए वह बधाई के पात्र हैं | कृति पठनीय एवं संग्रणीय है |
    कामना है ,कवि का रचना संसार निरंतर वैचारिकता ,सामाजिकता और कलात्मकता से सतत समृद्ध हो,समुन्नत हो और राष्ट्रभाव से सराबोर हो |
    ० सुरेन्द्र वाजपेयी ० १४ जनवरी २०१९ ई.
    समीक्षक लेखक ,,व्यंग,नव गीत
    % हिन्दी प्रचारक संस्थान
    पिशाचमोचन ,वाराणसी -२२१०१०
    उत्तर प्रदेश - भारत

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  20. सन्देश-
    भाई श्री सुखमंगल जी !
    *आपका आज का आगमन अत्यधिक हर्ष प्रदान करने वाला लगा | कालीमहाल और पांडेयपुर का गहरा सम्बन्ध प्रेमचंद -प्रसाद के गहरे लगाव और नित्य प्रति दोनों के बेनिया बाग़ में टहलने से जुड़ा है जिसका साहित्य में ऐतिहासिक महत्व है |
    *आपने मुझे साथ जोड़कर अंतर्राष्ट्रीय स्टार पर जो काम किया है कर रहे हैं ,वंदनीय है | बड़ी बात तो यह है कि आप चौबीस घंटे ,सोते-जागते प्रत्येक दशा में सिर्फ साहित्य की सोचते हैं | अआप ऐसे दीवानों की कमी है | *जयशंकर प्रसाद जी अपने आवास के जिस मंदिर पर बैठकर लिखते रहे और साहित्य में अमरता प्राप्त की,हम दोनों मिलकर पूरे विश्व को लेखन के जरिये बताएं कलके काली महाल वाले जयशंकर प्रसाद आज कहा और किस स्थिति में हैं |
    अजीत श्रीवास्तव (चपाचप बनारसी )
    शिव कृपा :सी-४ /२०४ -१ कालीमहाल
    वाराणसी (उत्तर प्रदेश -भारत

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  21. समीक्षा -
    गूगल के क्षेत्रीय मार्गदर्शक (वाराणसी परिक्षेत्र ),सुकवि सुख मंगल सिंह की अनवरत साहित्यिक एवं पत्रकारिता कर्म व साधना का संग्रह 'ई - बुक ' के माध्यम से पढ़ने का अवसर प्राप्त हुआ ,प्रसन्नता हुई | मीडिया के आधार पर यह निर्विवाद सत्य है कि वर्तमान डिजिटल युग में सुख मंगल जी की वर्षों की श्रमनिष्ठा अधिक सफल हुई है | वह अपने संकल्प - सिद्धि की और सतत अग्रसर हैं ,यह काशी के काव्य जगत के लिए गौरव की बात है | संतोष की बात है | हर्ष की बात है |
    सुकवि सुख मंगल सिंह ने साहित्यिक ,सांस्कृतिक ,धार्मिक ,राजनीतिक आदि क्षेत्रों में अपनी उपस्थिति और हिस्सेदारी कायम करते हुए अपना एक विशेष स्थान बनाया है | वह अपने रिर्पो ताज और ओज प्रवान राष्ट्रीय काव्य रचनाओं के लिए पूरे विश्व में पढ़े जाते हैं | यह उनकी असाधारण उपलब्धि है |वह निरंतर स्वाभिमानी और निराभिमानी रचनाशीलता व बहुमुखी प्रतिभा के धनी रचनाकार हैं | लोक मंगल के लिए सदैव तत्पर रहना उनकी प्रवृत्ति है | जो प्रशंसनीय है |
    इसके अतिरिक्त अन्य सारगर्भित ,उच्चस्तरीय ,वक्तव्यों ,व्यक्तित्यों से सुपरिचित कराने और अपने मानव धर्म, संस्कार, आचार -व्यवहार आदि को शोभनीय बनाने में 'साहित्य साधना (द्वितीय खण्ड ,ई -बुक )- सुखमंगल सिंह ' का प्रकाशन स्वागतेय है |
    आशा है, इससे प्रभावित होकर - पढ़कर नई पीढ़ी लाभान्वित होगी | प्रेरित होगी |
    मैं ,बंधुवर सुखमंगल जी की समृद्ध रचनाशीलता की मंगल कामना करता हूँ |
    सुरेन्द्र वाचपेयी
    (नवगीत ,व्यंग ,समीक्षक लेखक )
    द्वारा - हिन्दी प्रचार संस्थान
    पिशाचमोचन ,वाराणसी -२२१०१०
    (उत्तर प्रदेश -भारत )
    जनवरी १४,२०१९

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  22. "मानुष जन्म "
    -----------------------
    मैं कोई विद्वान नहीं ,
    विद्वता का पाठ पढ़ाऊँ !
    मैं कोई अज्ञानी नहीं ,
    अज्ञानियों मेँ अज्ञानी कहाऊँ ||

    सिंहों मेँ शानी नहीं ,
    ज्ञानियों मेँ ज्ञानी नहीं |
    मेरे देह - गेह मेँ,
    अशांति बैठी भी नहीं||

    मैं ध्रुव नहीं ,
    जो बन गमन करूँ !
    मैं राम नहीं कि,
    राक्षसों का वध करूँ ||

    मैं कृष्ण भी नहीं ज्यों ,
    गोपियों को वंशी सुनाऊँ |
    वृन्दावन मेँ उनके
    संग रास लीला रचाऊ||

    महाराजा पृथु नहीं ,
    मेरी पृथ्वी स्तुति करे |
    मैं ऋषि सनकादि नहीं ,
    महाराज पृथु सो उपदेश दूँ ||

    महाराज पुरंजन नहीं ,
    शिकार खेलने से रानी कुपित होगी |
    मैं राजर्षिभरत भी नहीं ,
    कि मृग योनि को पाऊँगा ||
    और ऋषि अंगि0 पुत्र कहाऊँ
    व्राहम्न कुल जन्म पाऊंगा |
    मैं इन्द्र भी नहीं ,
    ब्रह्म हत्या ले बिताऊँ ||

    मैं चित्रकेतु भी नहीं ,
    कि विश पान करूँ !
    वामन भगवान भी नहीं ,
    तीन पग मे ब्रह्मांड नापूँ ||

    मैं योग माया भी नहीं ,
    कंस बध की भविष्यवाणी करूँ |
    अधसुर- प्रलम्बासुर नहीं ,
    कि उद्धार की सोचूँ ||

    सुदर्शन - श्ंखचूर्ण नहीं ,
    जो उद्धार को सोचूँ |
    मैं अक्रूर जी नहीं ,
    ब्रज यात्रा पर जाऊँ||

    श्री कृष्ण की स्तुति में
    ही अपने को लगाऊँ|
    उद्धव जी की व्रजयात्रा -
    का वर्णन लोगों को सुनाऊँ ||
    मैं कोई विद्वान नहीं ,
    विद्वता का पाठ पढ़ाऊँ !
    उद्धव की गोपियों से बात ,
    और भ्रमर गीत गाउँ ||

    शाल्व - यादवॉ का युद्ध बताऊँ ,
    शाल्व उद्धार कराऊँ |
    मैं वसुदेव भी नहीं ,
    कृष्ण से ब्रह्म ज्ञान पाऊँ||

    यम नहीं कि देवकी के ,
    छ:pउटरों को लौटा लाऊं !
    मैं भक्ति हीं भी नहीं ,
    नारायन कि पूजाविधि कर न पाऊँ ||

    मैं मानव कुल में जन्म लिया,
    ज्ञानयोग कर्मयोग भक्ति योग सुनाऊँ !
    प्रलय के चारो प्रकारों से ,
    बचने का सुमार्ग दिखाऊँ ||

    क्रिया योग का वर्णन कर ,
    परमार्थ निरूपण करते जाऊ!
    राज्य- यूगधर्म और कलिकाल,
    में दोषों से बचते जाऊँ||

    भगवत कृपा सदा साथ ले ,
    संकीर्तन करते जाऊँ |
    मैं कोई विद्वान नहीं ,
    विद्वता का पाठ पढ़ाऊँ ||
    - सुखमंगल ,वाराणसी

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  23. समीक्षा :- कवि सुखमंगल सिंह की काव्य साधना (प्रथम खण्ड , ई बुक )
    ------------------------------------------------------------------------------
    गूगल के क्षेत्रीय मार्गदर्शक एवं वाराणसी के बहुचर्चित कवि सुखमंगल
    सिंह रचित यह संकलन कई दृष्टियों से सूचनापरक एवं पठनीय है |
    इसमें उन्होंने भारत की कुछ ऐतिहासिक घटनाओं, स्मारकों,मंगल-
    मूर्तियों के बारे में सचित्र जानकारियाँ दी हैं तो वर्तमान परिवेश की भी
    खोज - खबर को तिथिवार उद्घृत किया है | इससे आप पाठकों का ज्ञान-
    वर्धन होता है |राष्ट्र भावी योजनाओं , सरकारी घोषणाओं और राष्ट्रीय
    विकास को भी प्रस्तुत कर सकने में कवि ने सफलता प्राप्त की है |
    इन्हीं सामग्रियों के साथ - साथ कवि सुखमनंगल सिंह की अनेकानेक
    ओजस्वी कविताएं भी पाठकों का ध्यान आकर्षित करती हैं जिनमें राष्ट्र
    भाव ,राष्ट्र भक्ति , सामाजिक समरसता और पर्यावरण वचन और शुद्ध
    रखने की गूँज सुनाई पड़ती है | कवि मानवतावादी सन्देश का प्रचारक
    है |
    अतः प्रेम, सौहार्द ,सेवा ,सहयोग जैसे भावों के उत्थान एवं समृद्धि हेतु
    वह प्रतिबद्ध दिखाई पड़ता है जो प्रशंसनीय है |
    आशा है , इस कृति के माध्यम से कवि सुखमंगल सिंह विश्व स्तर पर
    भारतीय दृष्टिकोणों के प्रति ध्यान आकर्षित करेंगे |
    कामना है,कवि का रचना संसार व्यापक और अधिक से अधिक सुदृढ़
    हो |



    हस्ताक्षर ,सुरेन्द्र वाजपेयी ,

    -- समीक्षक लेखक ,,व्यंग,नव गीत
    % हिन्दी प्रचारक पब्लिकेशन्स प्रा ० लि ०
    सी २१/३० पिशाचमोचन ,वाराणसी -२२१०१०
    उत्तर प्रदेश - भारत

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  24. नदी
    सभ्यता के डोर से चलती चली नदी,
    ओर छोर तोड़कर चलती चली नदी ।
    प्यासे को पानी दे सहती चली नदी,
    लोगों की मनमानी ढहती चली नदी।
    पत्थरों को काटती बीहड़ों को छांटती,
    घाटियों को पार कर बहती चली नदी।
    धूप छांव सहती नदी नाले में ढहती,
    सरहद मचलते हुए चलती चली नदी।
    - सुखमंगल सिंह, अवध निवासी

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  25. वसुधा कौन बचाएगा
    अब वसुधा को कौन बचाने आएगा,
    सीना अपना फाड़ दिखाते - जाएगा!
    जहां न्याय के दरवाजे कांटे बबूल -
    फैसले न्यायालय में रौदे जाते हों ?
    वसुधा को अब कौन - - ।
    कृष्ण कर्म की गाथा की कसमें खाते,
    अवला नारी धरा पर रौदी जाती -
    जहां सिखंडी युद्ध समर के नारे गढ़ते।
    शान्ति पर बोली की गोली चलती -
    उस वसुधा को कौन - - ।
    नफरत के खंजर लेकर लोग दौड़ते,
    मान्धाता नागफहनी के कांटे बोते -
    जहां धर्म और मजहब की बातें होती,
    सिसक - सिसक कर मंगल मानवता रोती।
    उस वसुधा को कौन बचाने आएगा - ।
    - सुखमंगल सिंह, अवध निवासी

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  26. हिन्दू नव वर्ष 2082:

    हिन्दू नव वर्ष 2082 की शुभकामनाएँ,
    इस नए वर्ष में आपको खुशियाँ और समृद्धि मिले।
    चैत्र मास की शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा तिथि पर,
    हिन्दू नव वर्ष की शुरुआत होती है।

    इस नए वर्ष में आपके जीवन में नई उमंगें और उत्साह आएं,
    और आपके सभी सपने पूरे हों।
    आपके जीवन में खुशियों और समृद्धि की बरसात हो,
    और आपका जीवन सुखी और समृद्ध बने।

    हिन्दू नव वर्ष 2082 की शुभकामनाएँ,
    इस नए वर्ष में आपको खुशियाँ और समृद्धि मिले।
    आपके जीवन में नई उमंगें और उत्साह आएं,
    और आपके सभी सपने पूरे हों।

    इस नए वर्ष में आपके जीवन में खुशियों और समृद्धि की बरसात हो,
    और आपका जीवन सुखी और समृद्ध बने।
    हिन्दू नव वर्ष 2082 की शुभकामनाएँ,
    इस नए वर्ष में आपको खुशियाँ और समृद्धि मिले।।

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  27. इंद्रप्रस्थ की धरती पर,
    पांडवों का राज्य बसाया था।
    इंद्र की सहायता से बना यह शहर,
    पांडवों की राजधानी बन गया था।

    यहाँ पर युधिष्ठिर का राज्याभिषेक हुआ,
    और द्रौपदी का चीरहरण हुआ था।
    लेकिन भगवान कृष्ण की सहायता से,
    द्रौपदी की लाज बच गई थी।

    यहाँ पर पांडवों और कौरवों के बीच,
    युद्ध की तैयारी हुई थी।
    और भगवान कृष्ण ने पांडवों को,
    गीता का उपदेश दिया था।

    इंद्रप्रस्थ की धरती पर,
    इतिहास के पन्ने लिखे गए थे।
    यह शहर आज भी अपनी कहानी कह रहा है,
    और इतिहास को याद दिला रहा है।।
    - सुख मंगल सिंह

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  28. भागलपुर की भौगोलिक स्थिति:

    भागलपुर बिहार राज्य का एक महत्वपूर्ण शहर है, जो अपनी विशिष्ट भौगोलिक स्थिति के लिए प्रसिद्ध है। यह शहर गंगा नदी के किनारे स्थित है, जो इसे एक महत्वपूर्ण व्यापारिक और सांस्कृतिक केंद्र बनाती है।

    *स्थान*: भागलपुर शहर बिहार राज्य के भागलपुर जिले में स्थित है, जो राज्य के पूर्वी भाग में स्थित है। यह शहर गंगा नदी के किनारे स्थित है, जो इसे एक महत्वपूर्ण जलमार्ग प्रदान करती है।

    *निर्देशांक*: भागलपुर शहर के निर्देशांक 25.25°N अक्षांश और 87.02°E देशांतर हैं। यह शहर समुद्र तल से लगभग 141 फीट की ऊंचाई पर स्थित है।

    *भू-आकृति*: भागलपुर शहर की भू-आकृति बहुत ही विविध है, जो यहाँ के प्राकृतिक सौंदर्य को दर्शाती है। यह शहर गंगा नदी के किनारे स्थित है, जो इसे एक सुंदर और शांतिपूर्ण स्थल बनाती है।

    *जलवायु*: भागलपुर शहर की जलवायु बहुत ही गर्म और आर्द्र है, जो यहाँ के लोगों के जीवन को प्रभावित करती है। यह शहर गर्मियों में बहुत गर्म और सर्दियों में ठंडा रहता है।

    *नदियाँ*: भागलपुर शहर में गंगा नदी के अलावा कई अन्य नदियाँ भी हैं, जो यहाँ के लोगों के जीवन को प्रभावित करती हैं। इन नदियों में से कुछ प्रमुख हैं:

    - *गंगा नदी*: गंगा नदी भागलपुर शहर की सबसे महत्वपूर्ण नदी है, जो इसे एक महत्वपूर्ण जलमार्ग प्रदान करती है।
    - *कोसी नदी*: कोसी नदी भागलपुर शहर की एक अन्य महत्वपूर्ण नदी है, जो यहाँ के लोगों के जीवन को प्रभावित करती है।

    निष्कर्ष:

    भागलपुर शहर की भौगोलिक स्थिति बहुत ही विशिष्ट है, जो अपनी गंगा नदी के किनारे की स्थिति, विविध भू-आकृति, और गर्म और आर्द्र जलवायु के लिए प्रसिद्ध है। यह शहर अपने जलमार्गों और नदियों के लिए भी प्रसिद्ध है, जो यहाँ के लोगों के जीवन को प्रभावित करते हैं।
    - सुख मंगल सिंह

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  29. अयोध्या नगरी और सरजू का तट
    अयोध्या नगरी को साकेत के नाम से जाना जाता है।
    अयोध्या हिंदुओं के साथ प्रमुख पवित्र शहरों में से एक है। यह नगर कौशल साम्राज्य की राजधानी के रूप में प्रसिद्ध थी। साकेत अर्थात अयोध्या का शासक महाराज मनु के पुत्र इच्छा ने शासन किया था।
    वाल्मीक रामायण के अनुसार अयोध्या नगरी सुंदर और विशाल थी जिसमें सोने सोने और चांदी के महल थे इसकी सड़क साफ और सुधरी थी इसके बाजारों में सभी प्रकार के सामान उपलब्ध थे। अयोध्या को 6 प्रवेश द्वारों वाला शहर बताया गया है जो इसकी सुरक्षा और समृद्धि का प्रतीक था शहर के केंद्र में राम का महल था जो एक विशाल और सुंदर इमारत थी।
    अयोध्या के 63 में राजा राजा दशरथ हुए थे जिनके पुत्र राम लक्ष्मण भारत और शत्रुघ्न थे।
    पौराणिक ग के अनुसार अयोध्या भगवान राम की जन्म भूमि और राजधानी है। यह एक सुंदर और समृद्ध शहर जो सरयू नदी के किनारे बसा हुआ था।
    वेदों के अनुसार अयोध्या को माहिथी नाम से वर्णित किया गया है। जिसका अर्थ होता है महानगर।
    ऋग्वेद में अयोध्या को इच्छक वंश की राजधानी बताया गया है जो भगवान राम के पूर्वज थे।
    विष्णु पुराण के अनुसार साकेत नाम से वर्णित किया गया है जो भगवान विष्णु का अवतार स्थल है।
    पद्म पुराण में अभी मुक्त क्षेत्र बताया गया है जिसका अर्थ मोक्ष का स्थल कहा जाता है।
    -सुख मंगल सिंह

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  30. नीलम संजीवा रेड्डी जी भारत के छठे राष्ट्रपति थे, जिन्होंने 25 जुलाई 1977 से 25 जुलाई 1982 तक कार्य किया। उनका जन्म 19 मई 1913 को आंध्र प्रदेश के अनंतपुर जिले में इलुरु गांव में एक संपन्न किसान परिवार में हुआ था। रेड्डी जी ने मद्रास के अदयार में थियोसोफिकल हाई स्कूल में अपनी प्रारंभिक शिक्षा प्राप्त की और बाद में अनंतपुर में गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज में उच्च शिक्षा प्राप्त की।

    *राजनीतिक जीवन*

    नीलम संजीवा रेड्डी जी का राजनीतिक सफर बहुत ही प्रभावशाली था। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत युवा कांग्रेस के सदस्य के रूप में की और जल्द ही आंध्र प्रदेश कांग्रेस समिति के सचिव के रूप में नियुक्त हुए। वह 1951 में आंध्र प्रदेश कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष बने और बाद में राज्यसभा के सदस्य के रूप में चुने गए।

    *महत्वपूर्ण पद*

    - *आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री*: रेड्डी जी ने दो बार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में कार्य किया, पहली बार 1956 से 1959 तक और दूसरी बार 1962 से 1964 तक।
    - *केंद्रीय मंत्री*: 1964 में, रेड्डी जी को लाल बहादुर शास्त्री द्वारा केंद्रीय मंत्रिमंडल में शामिल किया गया था।
    - *लोकसभा अध्यक्ष*: 1977 में, रेड्डी जी लोकसभा के अध्यक्ष चुने गए और बाद में भारत के राष्ट्रपति बने।
    - *राष्ट्रपति*: रेड्डी जी भारत के छठे राष्ट्रपति थे और उन्होंने 1977 से 1982 तक कार्य किया। वह भारत के पहले गैर-कांग्रेसी राष्ट्रपति थे और बिना किसी विपक्ष के निर्वाचित हुए थे।

    *व्यक्तिगत जीवन*

    नीलम संजीवा रेड्डी जी का विवाह 8 जून 1935 को नागा रत्नम्मा के साथ हुआ था। उनके एक पुत्र और तीन पुत्रियाँ हैं। रेड्डी जी को श्री वेंकटेश्वर विश्वविद्यालय, तिरुपति द्वारा 1958 में मानद डॉक्टरेट की उपाधि से सम्मानित किया गया था। 1 जून 1996 को उनका निधन हो गया।
    -सुख मंगल सिंह

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  31. हिंदी भाषा प्यारी और प्रिय लगने के कई कारण हो सकते हैं:

    1. *मातृभाषा*: हिंदी भारत की सबसे अधिक बोली जाने वाली भाषा है, और कई लोगों के लिए यह उनकी मातृभाषा है। मातृभाषा हमेशा एक विशेष महत्व रखती है और लोगों को अपनी जड़ों से जुड़ने का एहसास कराती है।

    2. *सांस्कृतिक महत्व*: हिंदी भाषा भारतीय संस्कृति का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है। यह भाषा हमें हमारी संस्कृति, इतिहास, और परंपराओं से जोड़ती है।

    3. *भावनात्मक जुड़ाव*: हिंदी भाषा में कई शब्द और अभिव्यक्तियाँ हैं जो भावनात्मक जुड़ाव को दर्शाती हैं। यह भाषा हमें अपनी भावनाओं को व्यक्त करने का एक शक्तिशाली माध्यम प्रदान करती है।

    4. *साहित्यिक धरोहर*: हिंदी साहित्य एक समृद्ध धरोहर है, जिसमें कई महान कवियों और लेखकों ने अपनी रचनाएँ लिखी हैं। हिंदी साहित्य हमें जीवन के विभिन्न पहलुओं पर विचार करने का अवसर प्रदान करता है।

    5. *सरल और सुंदर*: हिंदी भाषा सरल और सुंदर है, जो इसे सीखने और बोलने में आनंददायक बनाती है। हिंदी की अपनी एक विशिष्ट शैली और मिठास है जो इसे प्यारा बनाती है।

    इन कारणों से, हिंदी भाषा प्यारी और प्रिय लगती है, और यह हमारे जीवन में एक महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
    -सुख मंगल सिंह

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  32. सरयू नदी और अयोध्या की कथा एक पवित्र और ऐतिहासिक कथा है। अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि है, और सरयू नदी इस शहर की जीवनरेखा है।

    *सरयू नदी का महत्व*

    सरयू नदी अयोध्या की पवित्र नदी है, जो भगवान राम के जीवन से जुड़ी हुई है। माना जाता है कि भगवान राम ने अपने जीवन के कई महत्वपूर्ण क्षणों में सरयू नदी में स्नान किया था। सरयू नदी का जल पवित्र माना जाता है, और लोग इसमें स्नान करके अपने पापों को धोने की कोशिश करते हैं।

    *अयोध्या की महिमा*

    अयोध्या भगवान राम की जन्मभूमि है, और यह शहर हिंदू धर्म में बहुत पवित्र माना जाता है। अयोध्या में भगवान राम के कई मंदिर हैं, जिनमें से राम जन्मभूमि मंदिर सबसे प्रसिद्ध है। इस मंदिर में भगवान राम की जन्मस्थली पर एक भव्य मंदिर का निर्माण किया जा रहा है, जो भगवान राम के भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल होगा।

    *सरयू नदी और अयोध्या की कथा*

    सरयू नदी और अयोध्या की कथा भगवान राम के जीवन से जुड़ी हुई है। माना जाता है कि भगवान राम ने अपने जीवन के कई महत्वपूर्ण क्षणों में सरयू नदी में स्नान किया था, और इस नदी के जल में अपने पापों को धोया था। सरयू नदी का जल पवित्र माना जाता है, और लोग इसमें स्नान करके अपने पापों को धोने की कोशिश करते हैं।

    अयोध्या की महिमा भगवान राम के जीवन से जुड़ी हुई है, और यह शहर हिंदू धर्म में बहुत पवित्र माना जाता है। भगवान राम के जन्मस्थली पर एक भव्य मंदिर का निर्माण किया जा रहा है, जो भगवान राम के भक्तों के लिए एक महत्वपूर्ण तीर्थ स्थल होगा।

    सरयू नदी और अयोध्या की कथा एक पवित्र और ऐतिहासिक कथा है, जो भगवान राम के जीवन से जुड़ी हुई है। यह कथा हमें भगवान राम के जीवन के बारे में बताती है, और हमें उनके आदर्शों और मूल्यों को अपनाने के लिए प्रेरित करती है।
    -सुख मंगल सिंह

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  33. अगर चाय बोल सकती तो क्या कहती? पर कविता:
    अगर चाय बोल सकती तो, क्या कहती हूँ
    मैं तो बस प्यार की चाशनी हूँ

    मैं चाहे तो सुबह की धूप हूँ
    मैं चाहे तो शाम की चांदनी हूँ
    मैं चाहे तो दिल की धड़कन हूँ
    मैं चाहे तो प्यार की कहानी हूँ

    मैं चाहे तो मीठी मुस्कान हूँ
    मैं चाहे तो गरमागरम हूँ
    मैं चाहे तो दोस्ती का प्याला हूँ
    मैं चाहे तो प्यार का सहारा हूँ

    मैं चाहे तो जीवन की रफ्तार हूँ
    मैं चाहे तो दिल की धड़कन हूँ
    मैं चाहे तो प्यार की भाषा हूँ
    मैं चाहे तो दिल की आवाज हूँ

    मैं चाहे तो ताजगी का समंदर हूँ
    मैं चाहे तो प्यार का दरिया हूँ
    मैं चाहे तो जीवन का सार हूँ
    मैं चाहे तो प्यार का प्यार हूँ

    अगर चाय बोल सकती तो, क्या कहती हूँ
    मैं तो बस प्यार की चाशनी हूँ। - सुखमंगल सिंह

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  34. मन का मैल ना धोये कोई, धोये केवल काया:(कविता)
    मन का मैल ना धोये कोई, धोये केवल काया
    मन की गंदगी से बचने का नहीं कोई माया

    मन के अशुद्ध विचारों से बढ़कर कोई पाप नहीं
    मन की शुद्धि के बिना कोई पूजा नहीं

    मन का मैल धोने के लिए आत्म-चिंतन जरूरी
    मन की शुद्धि के लिए आत्म-संयम जरूरी

    मन को शुद्ध करने के लिए सत्य का मार्ग अपनाएं
    मन की गंदगी से बचने के लिए अहिंसा का पालन करें

    मन का मैल धोने के लिए प्रेम और दया जरूरी
    मन की शुद्धि के लिए क्षमा और सहनशक्ति जरूरी

    मन को शुद्ध करने के लिए आत्म-निरीक्षण जरूरी
    मन की गंदगी से बचने के लिए सत्संग जरूरी

    मन का मैल धोने के लिए वैराग्य जरूरी
    मन की शुद्धि के लिए त्याग और संयम जरूरी।

    मन का मैल ना धोये कोई, धोये केवल काया
    मन की गंदगी से बचने का नहीं कोई माया

    मन के अशुद्ध विचारों से बढ़कर कोई पाप नहीं
    मन की शुद्धि के बिना कोई पूजा नहीं

    मन का मैल धोने के लिए आत्म-चिंतन जरूरी
    मन की शुद्धि के लिए आत्म-संयम जरूरी

    मन को शुद्ध करने के लिए सत्य का मार्ग अपनाएं
    मन की गंदगी से बचने के लिए अहिंसा का पालन करें

    मन का मैल धोने के लिए प्रेम और दया जरूरी
    मन की शुद्धि के लिए क्षमा और सहनशक्ति जरूरी

    मन को शुद्ध करने के लिए आत्म-निरीक्षण जरूरी
    मन की गंदगी से बचने के लिए सत्संग जरूरी

    मन का मैल धोने के लिए वैराग्य जरूरी
    मन की शुद्धि के लिए त्याग और संयम जरूरी

    मन को शुद्ध करने के लिए भगवान का नाम जरूरी
    मन की गंदगी से बचने के लिए गुरु की शरण जरूरी

    मन का मैल धोने के लिए आत्म-विश्वास जरूरी
    मन की शुद्धि के लिए आत्म-निर्भरता जरूरी।।
    - सुखमंगल सिंह

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  35. स्वामी विवेकानंद जी की कृतियों पर 300 शब्द में लेखन :
    स्वामी विवेकानंद जी एक महान विचारक, लेखक और वक्ता थे, जिन्होंने भारतीय संस्कृति और दर्शन को विश्वभर में प्रसिद्ध किया। उनकी कृतियों में वेदांत, योग, कर्मवाद, बौद्ध धर्म और भारतीय इतिहास पर सैंकड़ों किताबें शामिल हैं ¹।

    *उनकी प्रमुख कृतियों में शामिल हैं:*

    - *राजयोग*: यह पुस्तक योग के सिद्धांतों और प्रथाओं पर आधारित है।
    - *कर्मयोग*: यह पुस्तक कर्मयोग के सिद्धांतों और इसके महत्व पर चर्चा करती है।
    - *ज्ञानयोग*: यह पुस्तक ज्ञानयोग के सिद्धांतों और इसके महत्व पर चर्चा करती है।
    - *भक्तियोग*: यह पुस्तक भक्तियोग के सिद्धांतों और इसके महत्व पर चर्चा करती है।
    - *कोलंबो से अल्मोड़ा तक*: यह पुस्तक उनके भारत भ्रमण के दौरान दिए गए व्याख्यानों का संग्रह है ² ³।

    स्वामी विवेकानंद जी की कृतियों में उनके दर्शन और विचारों का प्रतिबिंब मिलता है। उन्होंने वेदांत और योग के सिद्धांतों को सरल और समझने योग्य भाषा में प्रस्तुत किया। उनकी कृतियों ने विश्वभर में लाखों लोगों को प्रेरित किया है और आज भी उनका महत्व बना हुआ है ⁴ ⁵।
    स्रोत:-
    स्वामी विवेकानंद जी की कृतियों के लिए आप निम्नलिखित स्रोतों का संदर्भ ले सकते हैं:

    - *विकिपीडिया*: स्वामी विवेकानंद जी की कृतियों की विस्तृत सूची विकिपीडिया पर उपलब्ध है।
    - *भारतकोश*: भारतकोश पर स्वामी विवेकानंद जी की रचनाओं की सूची उपलब्ध है।
    - *स्वामी विवेकानंद की आधिकारिक वेबसाइट*: स्वामी विवेकानंद की आधिकारिक वेबसाइट पर उनकी कृतियों का संग्रह उपलब्ध है।
    - *रामकृष्ण मिशन*: रामकृष्ण मिशन की वेबसाइट पर स्वामी विवेकानंद जी की कृतियों का संग्रह उपलब्ध है ¹ ² ³। - सुखमंगल सिंह

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  36. पक्षियों का कलरव:-
    पक्षियों के रंगों की दुनिया,
    कितनी सुंदर, कितनी अनोखी।
    नीले, हरे, पीले, लाल,
    चमकते हैं जैसे रंगीन बादल।

    पक्षियों की आवाज़ में माधुर्य है,
    संगीत की धुन में आनंद है।
    मुक्तक:
    पक्षियों के पंखों में रंग हैं,
    सपनों के रंग, जीवन के रंग।
    पक्षियों के रंगों की दुनिया,
    कितनी सुंदर, कितनी अनोखी।
    नीले, हरे, पीले, लाल,
    चमकते हैं जैसे रंगीन बादल।

    पक्षियों की आवाज़ में माधुर्य है,
    संगीत की धुन में आनंद है।
    मुक्तक:
    पक्षियों के पंखों में रंग हैं,
    सपनों के रंग, जीवन के रंग।

    पक्षियों के गीतों में खुशी है,
    जीवन के हर पल में मशी है।
    हरे-भरे पेड़ों पर रहते हैं,
    संगीत की धुन में नाचते हैं।

    मुक्तक:
    पक्षियों के दिल में प्रेम है,
    जीवन के हर पल में नेम है।।
    - सुखमंगल सिंह वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक

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  37. मकर संक्रांति:-
    मकर संक्रांति का त्योहार आया,
    सूरज की किरणें लेकर आया।
    पतंगें उड़ती हैं आसमान में,
    रंग-बिरंगे रंगों से सजाने।
    तिल और गुड़ की मिठास लेकर आया,
    सभी को खुशियों का संदेश लेकर आया।
    गंगा के तट पर लोग आते हैं,
    स्नान करके पवित्र होते हैं।
    सूर्य देव को धन्यवाद देते हैं,
    उत्तरायण की शुभकामनाएं देते हैं।
    पतंगें उड़ती हैं, हवाओं में,
    सभी के दिलों में खुशियां भरती हैं।
    मकर संक्रांति का त्योहार है,
    सभी को एकजुट करने का।
    सूरज की किरणें लेकर आया,
    सभी को खुशियों का संदेश लेकर आया।
    तिल और गुड़ की मिठास लेकर आया,
    सभी के दिलों में खुशियां भरती हैं।
    मकर संक्रांति की शुभकामनाएं ।
    - सुखमंगल सिंह वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक

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  38. मकर संक्रांति पर एक गीत :

    (अलाप)
    मकर संक्रांति आई, खुशियों की बहार आई
    सूरज की किरणें, लेकर आई रंगीन पतंगों की धूम
    तिल और गुड़ की मिठास, लेकर आई अपनों के प्रेम की खुशबू

    मकर संक्रांति आई, खुशियों की बहार आई
    गंगा के तट पर, लोग आते हैं स्नान करने
    सूर्य देव को धन्यवाद, देते हैं उत्तरायण की शुभकामनाएं

    पतंगें उड़ती हैं, हवाओं में रंग-बिरंगे रंगों से
    सभी के दिलों में, खुशियां भरती हैं
    मकर संक्रांति आई, खुशियों की बहार आई

    तिल और गुड़ की मिठास, लेकर आई अपनों के प्रेम की खुशबू
    सभी को एकजुट, करने का त्योहार है
    मकर संक्रांति आई, खुशियों की बहार आई

    सूरज की किरणें, लेकर आई रंगीन पतंगों की धूम
    गंगा के तट पर, लोग आते हैं स्नान करने
    सूर्य देव को धन्यवाद, देते हैं उत्तरायण की शुभकामनाएं

    मकर संक्रांति आई, खुशियों की बहार आई
    सभी के दिलों में, खुशियां भरती हैं
    मकर संक्रांति आई, खुशियों की बहार आई ।
    - सुखमंगल सिंह वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक

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  39. बढ़ती सर्दी के कहर में कुछ सावधानियां (आलेख )

    बढ़ती सर्दी के कहर में सावधानियां

    सर्दी का मौसम आ गया है, और इसके साथ ही बढ़ती ठंड ने लोगों को परेशान करना शुरू कर दिया है। सर्दी के मौसम में हमारे शरीर को विशेष ध्यान देने की आवश्यकता होती है, क्योंकि इस समय हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम हो जाती है और हम जल्दी बीमार पड़ सकते हैं।

    *सावधानियां:*

    1. *गर्म कपड़े पहनें*: सर्दी के मौसम में गर्म कपड़े पहनना बहुत जरूरी है। इससे हमारे शरीर को गर्मी मिलती है और हम ठंड से बच सकते हैं।
    2. *गर्म पानी पीएं*: सर्दी के मौसम में गर्म पानी पीना बहुत फायदेमंद होता है। इससे हमारे शरीर को गर्मी मिलती है और हम ठंड से बच सकते हैं।
    3. *खाने में गर्म चीजें शामिल करें*: सर्दी के मौसम में खाने में गर्म चीजें जैसे कि सूप, दलिया, आदि शामिल करें। इससे हमारे शरीर को गर्मी मिलती है और हम ठंड से बच सकते हैं।
    4. *व्यायाम करें*: सर्दी के मौसम में व्यायाम करना बहुत जरूरी है। इससे हमारे शरीर को गर्मी मिलती है और हम ठंड से बच सकते हैं।
    5. *धूम्रपान और शराब से बचें*: सर्दी के मौसम में धूम्रपान और शराब से बचना बहुत जरूरी है। इससे हमारे शरीर को नुकसान पहुंच सकता है।
    6. *विटामिन सी का सेवन करें*: सर्दी के मौसम में विटामिन सी का सेवन करना बहुत फायदेमंद होता है। इससे हमारे शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है और हम ठंड से बच सकते हैं।
    7. *सर्दी के मौसम में बाहर निकलने से बचें*: सर्दी के मौसम में बाहर निकलने से बचना बहुत जरूरी है। इससे हमारे शरीर को ठंड लग सकती है और हम बीमार पड़ सकते हैं।

    इन सावधानियों को अपनाकर हम सर्दी के मौसम में अपने आप को सुरक्षित रख सकते हैं और ठंड से बच सकते हैं।
    - सुखमंगल सिंह वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक

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  40. पतंग
    उल्लाल छंद में रचना :

    पतंग उड़ती है आसमान में,
    रंग-बिरंगे रंगों से सजाने।
    हवाओं के साथ खेलती है,
    जीवन को बनाती है सुंदर।

    पतंग की धुन सुनकर,
    दिल को मिलती है खुशी।
    पतंग उड़ती है ऊंचाई पर,
    सपनों को बनाती है साकार।

    पतंग की रील में फंसकर,
    जीवन को मिलती है दिशा।
    पतंग उड़ती है स्वतंत्र होकर,
    जीवन को बनाती है सुंदर।

    पतंग की धुन सुनकर,
    दिल को मिलती है खुशी।
    पतंग उड़ती है हवाओं में,
    जीवन को बनाती है सुंदर।

    पतंग उड़ती है आसमान में,
    रंग-बिरंगे रंगों से सजाने।
    पतंग की धुन सुनकर,
    दिल को मिलती है खुशी।

    उल्लाल छन्द में रचना:
    पतंग उड़ती है आसमान में,
    रंग-बिरंगे रंगों से सजाने।
    हवाओं के साथ खेलती है,
    जीवन को बनाती है सुंदर।

    पतंग की धुन सुनकर,
    दिल को मिलती है खुशी।
    पतंग उड़ती है ऊंचाई पर,
    सपनों को बनाती है साकार।
    पतंग उड़ती है आसमान में,
    रंग-बिरंगे रंगों से सजाने।
    हवाओं के साथ खेलती है,
    जीवन को बनाती है सुंदर।

    पतंग की धुन सुनकर,
    दिल को मिलती है खुशी।
    पतंग उड़ती है ऊंचाई पर,
    सपनों को बनाती है साकार।

    पतंग की रील में फंसकर,
    जीवन को मिलती है दिशा।
    पतंग उड़ती है स्वतंत्र होकर,
    जीवन को बनाती है सुंदर।

    पतंग उड़ती है हवाओं में,
    जीवन को बनाती है सुंदर।
    पतंग की धुन सुनकर,
    दिल को मिलती है खुशी।

    उल्लाल छन्द में रचना:
    पतंग उड़ती है आसमान में,
    रंग-बिरंगे रंगों से सजाने।
    हवाओं के साथ खेलती है,
    जीवन को बनाती है सुंदर।

    पतंग की धुन सुनकर,
    दिल को मिलती है खुशी।
    पतंग उड़ती है ऊंचाई पर,
    सपनों को बनाती है साकार।

    पतंग उड़ती है स्वतंत्र होकर,
    जीवन को बनाती है सुंदर।
    पतंग की धुन सुनकर,
    दिल को मिलती है खुशी।

    पतंग उड़ती है हवाओं में,
    जीवन को बनाती है सुंदर।
    पतंग की रील में फंसकर,
    जीवन को मिलती है दिशा।
    - सुखमंगल सिंह वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक

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  41. मकर संक्रांति पर्व :पतंग की उड़ान और खिचड़ी की खुशबू
    200 शब्दों का आलेख :
    मकर संक्रांति पर्व भारत का एक प्रमुख त्योहार है, जो सूर्य की उत्तरायण गति की शुरुआत का प्रतीक है। इस पर्व को पतंग की उड़ान और खिचड़ी की खुशबू के साथ मनाया जाता है।

    पतंग की उड़ान इस पर्व का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो आकाश में रंग-बिरंगे रंगों से सजती है। पतंग की उड़ान जीवन की उड़ान का प्रतीक है, जो हमें अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करती है।

    खिचड़ी इस पर्व का एक अन्य महत्वपूर्ण हिस्सा है, जो तिल, गुड़, और चावल से बनाई जाती है। खिचड़ी की खुशबू घरों में फैलती है, जो लोगों को एक साथ लाती है और उन्हें इस पर्व की खुशी में शामिल होने के लिए आमंत्रित करती है।

    मकर संक्रांति पर्व हमें जीवन की नई शुरुआत का संदेश देता है, जो हमें अपने सपनों को पूरा करने के लिए प्रेरित करता है। इस पर्व को मनाने से हमें जीवन की खुशियों का अनुभव होता है और हम अपने प्रियजनों के साथ समय बिताने का अवसर प्राप्त करते हैं।।
    - सुखमंगल सिंह,वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक

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  42. ईश्वर की राह में, कभी नहीं हारो
    दूसरा दरवाजा बिन खोले, पहला दरवाजा बंद करता
    जीवन की राह में, कभी नहीं डरो
    ईश्वर की कृपा से, सब कुछ पाओ।

    कठिनाइयों के बाद, आती है खुशी
    ईश्वर की राह में, कभी नहीं रुको
    दूसरा दरवाजा बिन खोले, पहला दरवाजा बंद करता
    जीवन की राह में, कभी नहीं डरो

    ईश्वर की कृपा से, सब कुछ मिलता है
    कभी नहीं हारो, जीवन की राह में
    दूसरा दरवाजा बिन खोले, पहला दरवाजा बंद करता
    जीवन की राह में, कभी नहीं डरो

    ईश्वर की राह में, कभी नहीं थको
    दूसरा दरवाजा बिन खोले, पहला दरवाजा बंद करता
    जीवन की राह में, कभी नहीं डरो
    ईश्वर की कृपा से, सब कुछ पाओ।।

    - सुखमंगल सिंह,
    वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक
    वाराणसी वासी, अवध निवासी अंबेडकर नगर उत्तर प्रदेश
    मोबाइल नंबर 8931966034

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  43. कर्म धर्म शब्द व्यर्थ है,
    जब तक मन में द्वेष है।
    कर्म धर्म का मर्म नहीं,
    जब तक मन में अहंकार है।

    कर्म धर्म का अर्थ नहीं,
    जब तक मन में लोभ है।
    कर्म धर्म का फल नहीं,
    जब तक मन में मोह है।

    कर्म धर्म का सार नहीं,
    जब तक मन में क्रोध है।
    कर्म धर्म का हार नहीं,
    जब तक मन में माया है।

    कर्म धर्म का त्याग नहीं,
    जब तक मन में आसक्ति है।
    कर्म धर्म का योग नहीं,
    जब तक मन में वैराग्य है।

    कर्म धर्म का फल मिलेगा,
    जब मन में प्रेम होगा।
    कर्म धर्म का सार मिलेगा,
    जब मन में शांति होगी। - सुखमंगल सिंह

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  44. "नृत्य गीत से नव वर्ष मनाएं "
    20 लाइन में कविता :-
    नव वर्ष आया, खुशियों का है त्योहार
    नृत्य गीत से, मनाएं हम सब मिलकर
    नव वर्ष आया, खुशियों का है त्योहार
    नृत्य गीत से, मनाएं हम सब मिलकर


    तालियों की गड़गड़ाहट, नृत्य की धूम
    नव वर्ष का जश्न, है सबके दिलों में चूम
    तालियों की गड़गड़ाहट, नृत्य की धूम
    नव वर्ष का जश्न, है सबके दिलों में चूम

    गिटार की धुन, बांसुरी की रीत
    नृत्य गीत से, मनाएं हम सब मिलकर प्रीत
    गिटार की धुन, बांसुरी की रीत
    नृत्य गीत से, मनाएं हम सब मिलकर प्रीत

    नव वर्ष आया, खुशियों का है त्योहार
    नृत्य गीत से, मनाएं हम सब मिलकर
    नव वर्ष आया, खुशियों का है त्योहार
    नृत्य गीत से, मनाएं हम सब मिलकर

    हैप्पी न्यू ईयर, हैप्पी न्यू ईयर
    नृत्य गीत से, मनाएं हम सब मिलकर
    हैप्पी न्यू ईयर, हैप्पी न्यू ईयर
    नृत्य गीत से, मनाएं हम सब मिलकर।। - सुखमंगल सिंह

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  45. "पतंग "पर कविता :
    पतंग उड़ती है आसमान में,
    रंग-बिरंगे रंगों से सजाने।
    हवाओं के साथ खेलती है,
    जीवन को बनाती है सुंदर।
    पतंग की धुन सुनकर,
    दिल को मिलती है खुशी।
    पतंग उड़ती है ऊंचाई पर,
    सपनों को बनाती है साकार।
    पतंग की रील में फंसकर,
    जीवन को मिलती है दिशा।
    पतंग उड़ती है स्वतंत्र होकर,
    जीवन को बनाती है सुंदर।
    पतंग की धुन सुनकर,
    दिल को मिलती है खुशी।
    पतंग उड़ती है हवाओं में,
    जीवन को बनाती है सुंदर।
    पतंग की रील में फंसकर,
    जीवन को मिलती है दिशा।
    पतंग उड़ती है आसमान में,
    रंग-बिरंगे रंगों से सजाने।
    पतंग की धुन सुनकर,
    दिल को मिलती है खुशी।। - सुखमंगल सिंह

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  46. "नया सफर है "
    नया सफर है, नई राहें हैं
    नए सपने, नई चाहें हैं
    चलो साथ में, इस सफर में
    नई उम्मीदें, नए गीत गाएं हैं।
    नया सफर है, नई शुरुआत है
    नए सपने, नई उम्मीदें हैं
    चलो साथ में, इस सफर में
    नई जिंदगी, नए गीत गाएं हैं

    नया सफर है, नई चुनौतियां हैं
    नए अवसर, नए इंतजार हैं
    चलो साथ में, इस सफर में
    नई जीत, नए गीत गाएं हैं

    नया सफर है, नई मंजिलें हैं
    नए रास्ते, नए निशान हैं
    चलो साथ में, इस सफर में
    नई सफलता, नए गीत गाएं हैं

    नया सफर है, नई खुशियां हैं
    नए सपने, नई चाहतें हैं
    चलो साथ में, इस सफर में
    नई जिंदगी, नए गीत गाएं हैं

    नया सफर है, नई राहें हैं
    नए सपने, नई चाहें हैं
    चलो साथ में, इस सफर में
    नई उम्मीदें, नए गीत गाएं हैं

    नया सफर है, नई चुनौतियां हैं
    नए अवसर, नए इंतजार हैं
    चलो साथ में, इस सफर में
    नई जीत, नए गीत गाएं हैं

    नया सफर है, नई मंजिलें हैं
    नए रास्ते, नए निशान हैं
    चलो साथ में, इस सफर में
    नई सफलता, नए गीत गाएं हैं

    नया सफर है, नई खुशियां हैं
    नए सपने, नई चाहतें हैं
    चलो साथ में, इस सफर में
    नई जिंदगी, नए गीत गाएं हैं।। - सुखमंगल सिंह

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  47. "भारतीय सेना - राष्ट्र की एकता के अडिग प्रहरी "
    (कविता )
    भारतीय सेना, राष्ट्र की शान है
    देश की रक्षा, उसका मान है
    सीमाओं पर खड़े, वो प्रहरी हैं
    राष्ट्र की एकता के, अडिग स्तंभ हैं

    वो दिन-रात पहरे देते हैं
    देश को सुरक्षित रखने के लिए
    वो अपनी जान की बाजी लगाते हैं
    राष्ट्र की रक्षा के लिए

    वो हिमालय की चोटियों पर खड़े हैं
    वो रेगिस्तानों में भी डटे हैं
    वो समुद्र की लावाओं में भी खड़े हैं
    वो राष्ट्र की रक्षा के लिए सदा तैयार हैं

    वो भारतीय सेना, राष्ट्र की शक्ति है
    देश की रक्षा, उसका धर्म है
    वो राष्ट्र की एकता के, अडिग प्रहरी हैं
    वो भारतीय सेना, राष्ट्र की शान है।।- सुख मंगल सिंह

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  48. "आस्था का आकाश "
    ( गीत छंद मुक्तक में भक्ति रस की रचना)

    आस्था का आकाश, भक्ति का विस्तार
    हृदय में जलती, प्रेम की ज्योति अपार
    सूर्य की किरणें, जग को जगाती
    आस्था की लीलाएं, मन को रगाती

    प्रेम की गंगा, बहती निरंतर
    भक्ति का सागर, लीलाएं करता
    आस्था के पंख, उड़ते आकाश
    हृदय में जलती, प्रेम की ज्योति प्रकाश

    आस्था का आकाश, भक्ति का विस्तार
    हृदय में जलती, प्रेम की ज्योति अपार
    सूर्य की किरणें, जग को जगाती
    आस्था की लीलाएं, मन को रगाती

    प्रेम की गंगा, बहती निरंतर
    भक्ति का सागर, लीलाएं करता
    आस्था के पंख, उड़ते आकाश
    हृदय में जलती, प्रेम की ज्योति प्रकाश

    आस्था का आकाश, भक्ति का विस्तार
    हृदय में जलती, प्रेम की ज्योति अपार
    सूर्य की किरणें, जग को जगाती
    आस्था की लीलाएं, मन को रगाती।। - डॉ सुखमंगल सिंह

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  49. "हमारे जमाने के माता-पिता"
    (हास्य व्यंग्य रचना )
    *हमारे जमाने के माता-पिता*

    हमारे जमाने के माता-पिता,
    थे बड़े ही सख्त और गंभीर।
    नहीं थी उनको कोई खबर,
    कैसी है ये दुनिया, कैसा है ये जीवन।

    उन्होंने हमें सिखाया,
    जीवन में सख्ती से जीना।
    नहीं थी उनको कोई पड़ी,
    कैसी है ये दुनिया, कैसा है ये प्यार।

    उन्होंने हमें सिखाया,
    जीवन में मेहनत करना।
    नहीं थी उनको कोई खबर,
    कैसी है ये दुनिया, कैसा है ये मजा।

    लेकिन हमने उनको दिखाया,
    कैसा है ये दुनिया, कैसा है ये जीवन।
    हमने उन्हें सिखाया,
    जीवन में मजा लेना, जीवन में प्यार करना।

    अब हमारे जमाने के माता-पिता,
    कहते हैं हमें, "अरे तुम लोग तो बड़े मॉर्डन हो गए हो!"
    हम कहते हैं, "अरे नहीं, हमने तो बस आपको ही फोलो किया है!" - सुखमंगल सिंह

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  50. *ऋतु बसंत आने को है*

    बसंत की ऋतु आने को है,
    फूलों की खुशबू से भरने को है।
    पेड़ों पर नए पत्ते आ रहे हैं,
    प्रकृति की सुंदरता बढ़ाने को है।

    हवा में एक नया जादू है,
    फूलों की खुशबू से भरपूर है।
    पक्षियों के गीत सुनाई दे रहे हैं,
    प्रेम की भावना जागृत करने को है।

    बसंत की ऋतु में प्रेम बढ़ता है,
    दिलों में नई उमंग आती है।
    जीवन में एक नया रंग भरता है,
    प्रकृति की सुंदरता बढ़ाने को है।

    बसंत की ऋतु आने को है,
    जीवन में एक नया अध्याय शुरू होने को है।
    प्रेम, खुशी और सुख की भावना,
    बसंत की ऋतु में बढ़ने को है।। - डॉ सुखमंगल सिंह

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  51. "गीतिका " समाप्त: आकार पदांत क्या करें गे।
    मापनी 1222 1222 1222 122
    पर गीतिका 9 जुग्म में:
    यह एक गीतिका की मापनी है: 1222 1222 1222 122

    यहाँ एक उदाहरण है:

    "गीतिका" समाप्त: आकार पदांत क्या करें गे।
    जीवन के रंग, प्यार पदांत क्या करें गे।

    मिलते हैं सपने, जागते ही खो जाते।
    जीवन के संग, आँसू पदांत क्या करें गे।

    दिल की बातें, कहने को रह जाती हैं।
    जीवन के संग, दर्द पदांत क्या करें गे।

    सपने देखे, लेकिन मिले नहीं।
    जीवन के संग, चाहत पदांत क्या करें गे।

    जीवन के रंग, बदलते रहते हैं।
    जीवन के संग, रंग पदांत क्या करें गे।

    दिल की आग, जलती रहती है।
    जीवन के संग, आग पदांत क्या करें गे।

    सपने देखे, लेकिन मिले नहीं।
    जीवन के संग, प्यार पदांत क्या करें गे।

    जीवन के संग, चलना है हमें।
    जीवन के संग, आगे पदांत क्या करें गे।

    जीवन के रंग, प्यार पदांत क्या करें गे।
    "गीतिका" समाप्त: आकार पदांत क्या करें गे। । - डॉ सुखमंगल सिंह

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  52. "कुंभ मेले" (गीत )
    संगम तट पर कुंभ मेला,
    आती है भक्ति की बेला।
    गंगा यमुना सरस्वती का संगम,
    होता है पापों का नाश यहाँ।

    साधु संतों की टोलियाँ,
    आती हैं दूर-दूर से।
    शाही स्नान के लिए,
    उमड़ती हैं भीड़ें यहाँ।

    हर-हर गंगे, जय-जय गंगे,
    गूंजते हैं जयकारे।
    भक्ति और प्रेम का,
    होता है यहाँ दीदार।

    कुंभ मेला, कुंभ मेला,
    पुण्य का है अवसर।
    आओ मिलकर करें,
    गंगा का अवतरण।।- सुख मंगल सिंह

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  53. "बढ़ती ठंढ में मुश्किलें "
    (कविता )
    बढ़ती ठंढ की रातें, मुश्किलें बढ़ती जातीं
    सर्द हवाएं चलती हैं, दिल को ठिठुरातीं
    कोठरी में बैठे हैं, हम सब इक साथ
    गर्म कपड़ों में भी, ठंढ लगती है रात

    पेड़-पौधे सूखे हैं, फूल नहीं खिलते
    पक्षी भी चुप हैं, गीत नहीं गाते
    सूरज भी नहीं दिखता, बादलों में छुपा
    ठंढ की मार से, सब कुछ है दुखी

    हम भी हैं ठिठुरे हुए, इस ठंढ में जीने
    गर्म कपड़ों में भी, ठंढ लगती है
    कोठरी में बैठे हैं, हम सब इक साथ
    गर्म चाय की प्याली, है सबकी चाहत

    बढ़ती ठंढ की रातें, मुश्किलें बढ़ती जातीं
    सर्द हवाएं चलती हैं, दिल को ठिठुरातीं
    हम भी हैं ठिठुरे हुए, इस ठंढ में जीने
    गर्म कपड़ों में भी, ठंढ लगती है।। - डॉ सुखमंगल सिंह

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  54. "बेटी: घर का प्राण"
    (रूप - घनश्ररी छंद)

    बेटी: घर का प्राण रूप

    घनश्ररी:

    बेटी है घर की शोभा, घर का प्राण रूप
    प्यार और स्नेह का, दिल में रखती है भूप

    बेटी है घर की लक्ष्मी, घर की शान
    पिता के दिल की दुआ, माता की पहचान

    बेटी है घर की खुशी, घर का गीत
    जिंदगी को बनाती है, प्यार और प्रीत

    बेटी है घर का भविष्य, घर का नाम
    प्यार और स्नेह का, दिल में रखती है काम

    बेटी है घर की बेटी, घर की शान
    पिता के दिल की दुआ, माता की पहचान

    घनश्ररी की विशेषताएं:

    - 8 पंक्तियों की एक इकाई होती है, जिसे घनश्ररी कहते हैं।
    - प्रत्येक पंक्ति में 16 मात्राएं होती हैं।
    - घनश्ररी में कविता की लातिनी और भावपूर्ण शैली होती है।
    - घनश्ररी में अक्सर भक्ति, प्रेम और जीवन के अनुभवों को व्यक्त किया जाता है।।- सुख मंगल सिंह

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  55. नारी तेरे रूप अनेक, तू है शक्ति की प्रतीक
    तू है माँ, तू है बहन, तू है जीवन की रेहन
    तू है लक्ष्मी, तू है सरस्वती, तू है दुर्गा की शक्ति
    तू है साहस, तू है वीरता, तू है जीवन की रक्ति।

    तू है प्रेम, तू है शांति, तू है जीवन की गति
    तू है नारी, तू है शक्ति, तू है जीवन की रृति
    तू है माँ, तू है जननी, तू है जीवन की कहानी
    तू है नारी, तू है शक्ति, तू है जीवन की वाणी।
    - सुखमंगल सिंह

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  56. दुर्गा है मेरी मां, शक्ति की प्रतीक है वो
    शेर पर सवार होकर, आती है वो
    मेरी रक्षा के लिए, वो लेती है त्रिशूल
    मेरी माँ, मेरी दुर्गा, मेरी जीवन की मूल
    मेरी पूजा स्वीकार कर, मुझे शक्ति दे ।
    -- सुख मंगल सिंह

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  57. नव संवत्सर का आगमन, नवरात्रि का पर्व है आया
    शक्ति की उपासना का, यह समय है सुहाना
    दुर्गा की शक्ति से, जीवन में आए उजियारा
    नवजीवन का संचार हो, यही है प्रार्थना हमारी

    नवरात्रि के नौ दिन, शक्ति की पूजा के हैं दिन
    महाकाली, महालक्ष्मी, महासरस्वती का रूप है
    शक्ति की उपासना से, जीवन में आए शक्ति
    नव संवत्सर का यह पर्व, जीवन को दे दिशा नई

    नवरात्रि की शुभकामनाएं, नव संवत्सर की हार्दिक शुभकामनाएं 🙏 - सुख मंगल सिंह

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  58. 😊 यहाँ संस्मरण, कहानी, और आलेख हैं:

    *1. नवरात्र का आध्यात्मिक व वैज्ञानिक समन्वय*

    नवरात्र एक ऐसा पर्व है जो आध्यात्मिक और वैज्ञानिक दोनों दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण है। यह पर्व हमें शक्ति, संतुलन और आत्म-विकास की दिशा में प्रेरित करता है...

    *2. नारी तेरे रूप अनेक कविता*

    नारी तेरे रूप अनेक, तू है शक्ति की प्रतीक
    तू है माँ, तू है बहन, तू है जीवन की रेहन
    तू है लक्ष्मी, तू है सरस्वती, तू है दुर्गा की शक्ति
    तू है साहस, तू है वीरता, तू है जीवन की रक्ति...

    *3. वीर सम्राट योद्धा महाराणा प्रताप की वीरता की गाथा*

    महाराणा प्रताप, वीर सम्राट योद्धा
    मुगलों की सेवा को परास्त किया, अपनी वीरता से
    हल्दीघाटी के युद्ध में, लड़े थे रणभूमि में
    मुगलों की सेना को हराया, अपनी शौर्यता से...

    *4. दो दोस्तों की यात्रा कहानी*

    एक छोटे से गांव में दो दोस्त, रमेश और श्याम, रहते थे। वे दोनों बचपन से ही दोस्त थे और साथ में खेलते-कहलते बड़े हुए थे...

    *5. नवसंवत्सर - संस्कृति का स्वर्ण पर्व कविता*

    नवसंवत्सर का स्वर्णिम दिन आता है
    संस्कृति का पर्व, जीवन का नाता है
    प्रकृति की हरियाली, फूलों की बहार
    नवसंवत्सर का आगमन, जीवन का आधार...

    *6. शक्ति उपासना कविता*

    शक्ति की उपासना, जीवन का आधार
    देवी की पूजा, शक्ति का विस्तार
    दुर्गा की शक्ति, जीवन का बल
    महाकाली की शक्ति, जीवन का रक्षक...

    *7. माई दुर्गा भवानी आई मोरे अंगना भजन*

    माई दुर्गा भवानी आई मोरे अंगना
    शेर पर सवार होकर आई मोरे अंगना
    माई दुर्गा भवानी आई मोरे अंगना...

    *8. अम्बे पधारो मेरे अंगना भक्ति गीत*

    अम्बे पधारो मेरे अंगना, माता री लाऊं चरण में पानी
    अम्बे पधारो मेरे अंगना
    शेर पर सवार होकर आई, त्रिशूल धारी चंडी रूप धारी...

    *9. वासुदेव पर एक भक्ति गीत*

    वासुदेव कृष्ण, मेरे जीवन के आधार
    तुम्हारी कृपा से, मेरा जीवन है साकार
    गोकुल की गलियों में, तुम्हारी बांसुरी बजती
    यमुना के किनारे, तुम्हारी लीला है अनूठी...

    - सुख मंगल सिंह , वरिष्ठ साहित्यकार कवि एवं लेखक वाराणसी

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